हरेंद्र प्रताप पांडे का कबूलनामा


आप सब मुझे माफ कर देंगे।एम एल सी बन कर मै नैतिक आधार खो दिया हूं

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मैं संघ का प्रचारक था।प्रचारक के नाते मुझे 2001 में राजनैतिक क्षेत्र में भेजा गया।

2005 में बिहार में जंगल राज खत्म हुआ। एन डी ए की सरकार बनी।प्रचारक जीवन से लौटने का निर्णय। 

आर्थिक स्वावलंबन हेतु लेखन। बिहार पर मंडराता खतरा पुस्तक  लिखा।अन्य कुछ भी करने की योजना बनाई। पर अपने शुभचिन्तको के कहने पर राजनैतिक प्रभारी के नाते पूर्वोत्तर भारत का दायित्व लिया तथा उनके ही कहने पर एम एल सी बनना स्वीकार  किया।

एम एल सी पद लेना मेरे जीवन की सबसे बड़ी भूल  थी।

मैं अपनी नजरों मे ही गीर गया।गलत के विरोध का नैतिक आधार खो दिया।

2010 दिसंबर में एम एल सी बना।मेरी आत्मा ने मुझे झकझोरना शुरु किया।

2013 जुलाई में एम एल सी से इस्तीफा देना चाहा।तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह से अनुमती मांगा।उन्होेंने मना कर दिया पर मैने उन्हें कह दिया मैं अब कोई दायित्व नहीं लुंगा। 

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1974 आंदोलन के जेल के साथी वरिष्ठ पत्रकार  मित्र  नवेन्दु ने मेरे पोस्ट पर जो कुछ भी लिखा उसे लेकर आत्मावलोकन किया।

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मित्रो आज जो कुछ भी गलत हो रहा है वह मै भी देख रहा हूं।पर विरोध का नैतिक आधार मैने खो दिया है अतःमाफीनामा सार्वजनिक कर रहा हूं।शायद उससे मन कुछ हलका हो जाए।

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मेरे लेखन मे भी मेरा अतीत व्यवधान खड़ा कर रहा पर ---हम से जो कुछ  भी हो पायेगा करता रहूँगा।

 


हरेंद्र प्रताप पांडे भारतीय जनता पार्टी, बिहार के एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जिन्होंने 2010 से 2016 तक बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में कार्य किया।[1] उन्होंने 2001 से 2006 तक बिहार राज्य महासचिव (संगठन), 2007 से 2010 तक भाजपा असम और भाजपा सिक्किम के प्रभारी, 2010 से 2014 तक भाजपा झारखंड के रूप में भाजपा के संगठन में विभिन्न पदों पर कार्य किया है।[2]



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